तुम्हारी रजा में ना राजी रहा मैं भजन लिरिक्स

तर्ज – तुम्ही मेरे मंदिर।

तुम्हारी रजा में ना राजी रहा मैं,
शायद इसी की सजा मिल रही है,
मेरे मन जो आया वो करता रहा मैं,
शायद इसी की सजा मिल रही है।।

तुम्हारी रजा में ना राजी रहा मैं भजन लिरिक्स


सोचा था तुमने भला मेरी खातिर,
मगर मैं ना समझा ऐसा हूँ काफिर,
दुनिया की मोजों में उलझा रहा मैं,
शायद इसी की सजा मिल रही है।।


दिए थे प्रभु तुमने हमको इशारे,
मगर आँख पे थे परदे हमारे,
पर्दो की परतों में उलझा रहा मैं,
शायद इसी की सजा मिल रही है।।


किया ‘स्नेह’ तुमने समझ मैं ना पाया,
देर हो चुकी थी तब ही समझ में है आया,
लुटाता रहा तू उड़ाता रहा मैं,
शायद इसी की सजा मिल रही है।।


तुम्हारी रजा में ना राजी रहा मैं,
शायद इसी की सजा मिल रही है,
मेरे मन जो आया वो करता रहा मैं,
शायद इसी की सजा मिल रही है।।

Singer – Sanjay Mittal Ji

Tumhari raja me na raji raha me full bhajan



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